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सुहागा-मनका परीक्षण

बोरेक्स बीड परीक्षण (Borax bead test)

सुहागा-मनका परीक्षण (borax bead test या blister test / बोरैक्स बीड टेस्ट) अनेकों प्रकार के मनका-परीक्षणों में से एक है। यह परीक्षण गुणात्मक अकार्बनिक विश्लेषणAnalysis का परम्परागत अंग है जिसके द्वारा दिये गये नमूने में कुछ धातुओं की उपस्थिति का अनुमान होता है। सन १८१२ में इसे बर्जीलियस ने सुझाया था। [1] सुहागा परीक्षण के बाद सबसे महत्वपूर्ण मनका-परीक्षण माइक्रोकॉस्मिक साल्ट परीक्षण है।

परीक्षण विधि

ज्वाला परीक्षण में उपयोग किये जाने वाले प्लेटिनम या नाइक्रोम के तार के सिरे पर एक छोटा सा गोला (लूप) बना लिया जाता है। इस लूप को बुन्सन बर्नर पर तब तक गरम करते हैं जब तक कि लाल न हो जाय। इसके बाद इस लूप को सुहागे के चूर्ण में डुबा दिया जाता है। इस पर सुहागे के जो कण चिपक जाते हैं उनको ज्वाला के सबसे गरम भाग में गर्म करते हैं। गरम करने पर सुहागा में मौजूद क्रिस्टलCrystal/Crystallineन जल वाष्पVapourीकृत होकर निकल जाता है और उसके निकलने पर सुहागा 'फूल' जाता है और फिर सिकुड़कर एक रंगहीन पारदर्शी काँच-जैसा 'मनका' बनाता है। यह वास्तव में सोडियम मेटाबोरेट तथा बोरिक एन्हाइड्राइड का मिश्रणMixture है।

अब इस माणक को नम किया जाता है (प्रायः जीभ से छूकर)। नम मानक को विश्लेषण के लिये दिये गये नमूने में डुबाया जाता है किन्तु ध्यान रखते हैं कि नमूने की बहुत कम मात्रा इससे चिपके।( यदि बहुत अधिक पदार्थ इससे चिपक जायेगा तो मनका काला और अपारदशी हो जायेगा।)। अब मनका और उससे चिपके नमूने को ज्वाला के निचले भाग (अपचायकOxidant ज्वाला) में गरम करते हैं। इसके बाद इसको ठण्दा होने देते हैं और इसके रंग को ध्यानपूर्वक देखते हैं।

ताँबा, लोहा, क्रोमियम, मैंगनीज, कोबाल्ट और निकल के लवणSaltों के अपने विशिष्ट रंग के मनका देखने को मिलते हैं। परीक्षण होने के बाद मनका को इसके गलन ताप तक गरम करके पानी के बरतन में डुबा दिया जाता है जिससे मनका समाप्त हो जाता है।


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