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मि‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌श्रधातु

(en:) Alloy

मिश्रधातु (Alloy): दो या अधिक धातुओं या एक या अधिक धातु एवं एक अधातुNon-metal के समांगी मिश्रणMixture (आंशिक या पूर्ण ठोस-विलयनSolution) को मिश्रातु या मिश्रधातु कहा जाता है।

महत्वपूर्ण मिश्रित धातुएँ एवं उनके संघटकComponent

कास्टिंग के लिए द्रव कांसा को मोल्ड में उड़ेला जा रहा है।

मिश्रित धातु ———– संघटक

1. पीतलBrass - तांबा (75 प्रतिशत) + जस्ता (25 प्रतिशत)

2. घंटा धातु (Bell metal) - तांबा (75 प्रतिशत) + टिन (25 प्रतिशत)

3. कांसा - तांबा (75 प्रतिशत) + टिन (25 प्रतिशत)

4. जर्मन सिल्वर - तांबा (50 प्रतिशत) + जस्ता (25 प्रतिशत) + निकेल (25 प्रतिशत)

5. एल्युमीनियम कांसा- तांबा (50 प्रतिशत) एल्युमीनियम (40 प्रतिशत) + लोहा (10 प्रतिशत)

6. गन मेटलGun metal - तांबा (88 प्रतिशत) + जस्ता (2 प्रतिशत) + टिन (१० प्रतिशत)

7. टाइप (प्रिटिंग) मेटल लेड (60 प्रतिशत) + एंटीमनी (30 प्रतिशत) + टिन (10 प्रतिशत)

8. स्टेनलेस स्टील - लोहा + क्रोमियम + निकेल

9. हिंडालियम - एल्युमीनियम (91 प्रतिशत) + मैग्नीशियम (9 प्रतिशत)

10. डेल्टा धातु - तांबा (55 प्रतिशत) + जस्ता (41 प्रतिशत) + लोहा (4 प्रतिशत)

11. डच मेटल - तांबा (80 प्रतिशत) + जस्ता (20 प्रतिशत)

12. मोनल धातु - तांबा (27 प्रतिशत) + निकिल (70 प्रतिशत) + लोहा (3 प्रतिशत)

13. टांका (solder) - टिन (67 प्रतिशत) + सीसा (33 प्रतिशत)

14. बुड्‌स धातु - बिस्मथ (33.5 प्रतिशत) + सीसा (33 प्रतिशत) + टिन (19 प्रतिशत) + कैडमियम (14.5 प्रतिशत)

15. कांस्टैटन - तांबा (60 प्रतिशत) + निकिल (40 प्रतिशत)

16. मुट्‌ज धातु - तांबा (60 प्रतिशत) + जस्ता (40 प्रतिशत)

  • प्रायः मिश्र धातुओं के गुण उस मिश्रधातु को बनाने वाले संघटकों के गुणों से भिन्न होते हैं।
  • इस्पात एक मिश्रधातु है| इस्पात, लोहे की अपेक्षा अधिक मजबूत होता है। काँसा, पीतल, टाँका (सोल्डर) आदि मिश्रातु हैं|
  • यदि मिश्रधातु का एक अवयव पारा (Hg) हो, तो वैसा मिश्रधातु अमलगम (Amalgam) कहलाता है।
  • प्रत्येक मिश्रधातु में कुछ निश्चित उपयोगी गुण होते हैं। ये गुण मिश्रधातु बनाने वाले अवयवी तत्वElementों के मूल गुणों से भिन्न होते हैं। अवयवी तत्वों के अनुपात को कम या अधिक करके इन गुणों में परिवर्तन किया जा सकता है।

मिश्रधातुओं में निम्नलिखित विशेषताएं पायी जाती है-

  • मिश्रधातुएँ अपनी अवयवी धातुओं से प्रायः अधिक कठोर होती हैं।
  • मिश्रधातुएँ अपनी अवयवी धातुओं की अपेक्षा अधिक संक्षारणCorrosionरोधी होती हैं।
  • इनके गलनांक शुद्ध अवयवी धातुओं की तुलना में प्रायः कम होते हैं।

1939 ई0 में अमरीका वस्तु परीक्षक परिषद् ने मिश्रधातु की निम्नलिखित परिभाषा की-

मिश्रधातु वह वस्तु है जिसमें धातु के सब गुण होते हैं। इसमें दो या दो से अधिक धातुएँ, या धातु और अधातु होती है, जो पिघली हुई दशा में एक दूसरे से पूर्ण रूप से घुली रहती हैं और ठोस होने पर स्पष्ट परतों में अलग नहीं होती।

यह निश्चय करना कि मिश्रधातुएँ साधारण मिश्रण हैं या रासायनिक यौगिक, एक जटिल समस्या है।

मिश्रधातुओं के गलनांक निकालने पर ज्ञात हुआ है कि मिश्र धातुओं का व्यवहार दो प्रकार का है: कुछ मिश्रधातुओं का गलनांक जैसे जैसे किसी अवयव धातु की मात्रा बदलती हैं वैसे-वैसे बदलता है, यह मिश्रण का गुण है और कुछ मिश्रधातुओं का गलनांक एक स्थिर ताप होता है, जो प्रकट करता है कि मिश्रधातुएँ यौगिकCompound हैं।

मिश्रधातुओं के भौतिक तथा रासायनिक गुण अपनी अवयव धातुओं के गुणों से भिन्न होते हैं और मिश्रधातुओं के गुण किसी भी प्रकार से अवयव धातुओं के गुणों के माध्य नहीं होते। यह भिन्नता इस कारण से है कि जब धातुओं को एक साथ पिघलाते हैं, तब वे कितने ही अंतराधातुक यौगिक तथा ठोस विलयन बनाती हैं। मिश्रधातु का घनत्वDensity अपनी अवयव-धातुओं के माध्य घनत्व से कम या अधिक हो सकता है। कुछ मिश्रधातुओं का रंग अपनी अवयव धातुओं के रंगों से बिल्कुल ही भिन्न होता है। ये अपनी अवयव धातुओं से कठोरतर, किंतु कम लचीली तथा घातवर्घ्य और अधिक भंगुर होती हैं। मिश्रधातुओं का गलनांक सर्वदा अधिकतम ताप पर पिघलनेवाली अवयवधातु के गलनांक से भी कम होता है। और प्राय: न्यूनतम ताप पर पिघलनेवाली अवयव धातु के गलनांक से भी कम होता है। उदाहरणार्थ, एक मिश्रधातु, जिसमें सीसा (4 भाग), टिन (2 भाग), बिस्मथ (6 भाग) तथा कैडमियम (1 भाग) हैं, 75˚सें0 पर गलती है, जब कि न्यूनतम ताप पर पिघलने वाली अवयव-धातु, टिन का गलनांक 232˚ सें0 है। ये सब वे गुण हैं जिनके कारण मिश्रधातुएँ शुद्ध धातुओं से अधिक मूल्यवान हो जाती हैं तथा उद्योग में अधिक उपयोगी सिद्ध होती हैं।

वर्गीकरण ऊपर वर्णित फलों द्वारा तथा सूक्ष्मदर्शी, एक्स-किरण वर्णक्रम मापी, ऊष्मीय तथा रासायनिक विश्लेषणAnalysis और दूसरे भौतिक परीक्षणों द्वारा मिश्रधातओं के संगठन तथा क्रिस्टलCrystal/Crystallineीय रचना के विस्तृत अध्ययन के परिणामस्वरूप, मिश्रधातुओं को तीन श्रेणियों में रखा गया है। यह विभाजन मिश्रधातुओं में अवयव धातुओं के परमाणुAtomओं का समूह किस प्रकार से संगठित है, उसके आधार पर किया गया है। ये तीन श्रेणियाँ निम्नलिखित हैं:

समान्य मिश्रण Alliage precipite.png

इस प्रकार की मिश्रधातुओं में अवयव धातुएँ जब पिघली हुई होती हैं, तब वे एक दूसरे में घुली हुई रहती हैं, किंतु ठोस होने पर धातुओं के क्रिस्टल अलग-अलग हो जाते हैं, अर्थात्‌ धातुएँ परस्पर अविलेयInsoluble हैं। इस प्रकार मिश्रधातु प्रत्येक अवयव धातु के शुद्ध क्रिस्टल का मिश्रण होती है और ठंडा करने पर कोई एक अवयव धातु ठोस रूप में पृथक्‌ हो जाती है। उदाहरणार्थ, एक तरल मिश्रधातु, जिसमें मात्रानुसार 10 भाग सीसा और 90 भाग टिन होते हैं, जब ठंडी की जाती है तब शुद्ध टिन के क्रिस्टल प्रथम उसी प्रकार से पृथक्‌ होते हैं जिस प्रकार शुद्ध हिम के क्रिस्टल चीनी के तनुDilute विलयन में से ठंडा करने पर पृथक्‌ होते हैं। जिस ताप पर टिन के क्रिस्टल पृथक होना प्रारंभ करते है, वह ताप शुद्ध टिन के गलनांक से कम होता है। टिन के गलनांक को जब उसमें सीसा घुला रहता है, ज्ञात कर सीसे का अणुMoleculeभार उसी नियम द्वारा निकालते हैं जिस नियम से पानी में घुली वस्तओं का अणुभार निकालते हैं। इस विधि से उन कई धातुओं का अणुभार निकाला गया है, जो तनुघात्विक विलयन में अलग परमाणु के रूप में रहती है। सीसा-ऐंटीमनी मिश्रधातु मिश्रण श्रेणी की है। ऐंटीमनी भंगुर होता है और सीसा मुलायम। मुद्रण धातु सीसी, ऐंटीमनी और अत्यंत कम मात्रा में टिन की मिश्रधातु है। इस मिश्रधातु में ऐंटीमनी की कठोरताHardness तो होती है, किंतु यह उसकी तरह भंगुर नहीं होती।

ठोस विलयन इस प्रकार की मिश्रधातुओं में एक अवयव धातु के परमाणु दूसरी अवयव धातु के क्रिस्टलीय ढाँचे (crystalline lattice) में भली-भाँति बैठ जाते हैं। ठोस विलयन श्रेणी की मिश्रधातुएँ दो भिन्न प्रकार की होती है:

Alliage solution solide.png

(क) अंतराकाशीInterstitial (interstitial) मध्य ठोस विलयन-इस प्रकार की मिश्रधातुओं में अधातु तत्त्व, जैसे हाइड्रोजन, कार्बन, नाइट्रोजन और बोरॉन के लघु परमाणु धातु के क्रिस्टलीय ढाँचे के मध्यस्थानों में अपना स्थान बनाते हैं। साधारणत: इससे धातु की रचना में कोई विशेष अंतर नहीं पड़ता है, केवल उसमें थोड़ी सी विकृति (distortion) आ जाती है। हॉग (Hogg) के अनुसार अंतराकाशी मध्य ठोस विलयन तभी बनेंगे, जब अधातु और धातु के परमाणुओं के अर्द्धव्यासों का अनुपात 0.59 से कम हो। (ख) प्रतिस्थापित ठोस विलयन वे होते हैं, जिनमें एक तत्व के परमाणु दूसरे तत्व के क्रिस्टलीय ढाँचे में उन्हीं स्थानों को ग्रहण करते हैं जहाँ पर उनके पहले दूसरे तत्व के परमाणु स्थित थे। इस प्रकार की ठोस विलेयताSolubility दोनों तत्वों के परमाणुओं के अर्द्धव्यास सर्वसम (identical), या लगभग समान हों, तो ठोस विलेयता पूर्ण रूप से होगी। उदाहरणार्थ, ताँबे के परमाणु का अर्द्धव्यास 12.75 नैनोमीटर तथा निकल के परमाणु का अर्द्धव्यास 12.43 नैनोमीटर का होता है, अत: इनकी मिश्रधातु में ठोस विलेयता पूर्ण रूप से होगी। अगर अर्द्धव्यासों में अधिक अंतर हो, जैसे टिन और सीसे के परमाणुओं का अर्द्धव्यास क्रमश: 15.0 नैनोमीटर तथा 17.46 नैनोमीटर है, तो केवल सीमित ठोस विलेयता होगी। अगर दोनों धातुओं के ऋणविद्युती अंतर (electronegative difference) में कमी हो, तो इस प्रकार की ठोस विलेयता और भी अच्छी तरह से होगी। Alliage ordonne desordonne.png

ताँबा-निकल की अनेक मिश्रधातुएँ जिनका महत्वपूर्ण उपयोग है, ठोस विलयन की श्रेणी में आती हैं। उदाहरणार्थ, वे मिश्रधातुएँ जिनसे निकल के सिक्के, राइफल की गोलियों की टोपियाँ और एक तार जिसका वैद्युत प्रतिरोध अधिक होता है, बनता है। कनाडा के बहुत से खनिजों में ताँबा और निकल के सल्फाइड होते हैं, जिनको गलाने से एक मिश्रधातु मिलती है। इसमें निकल और ताँबा क्रमश: 67 और 28 प्रतिशत तथा शेष पाँच प्रतिशत में लोहा और मैंगनीज़ होते हैं। इस मिश्रधातु को मोनेल (Monel) धातु कहते हैं। यह अधिक तन्य, लचीली तथा संक्षारण प्रतिरोधक होती है।

अंतराधातुक यौगिक (Intermetallic compound) मुख्य लेख : अन्तराधातुक साधारणत: धातुएँ एक दूसरे के साथ संयोग कर यौगिक नहीं बनातीं, किंतु ऊष्माHeat विश्लेषण द्वारा ज्ञात हुआ है कि धातुएँ एक दूसरे के साथ संयोग कर बहुत अधिक संख्या में यौगिक बनाती हैं। इन यौगिकों का वर्गीय नाम अंतराधातुक यौगिक है। इस प्रकार के सबसे अधिक यौगिक क्षार और क्षारीय मिट्टी की धातुएँ, आवर्तPeriod सारणी के विषम उपवर्गो (odd subgroups) की धातुओं के साथ संयोग करके, बनाती हैं। इन यौगिकों में धातुएँ किस मात्रा में मिली हुई हैं, इसको रासायनिक सूत्रों द्वारा दर्शाते हैं। इन सूत्रों के अध्ययन से ज्ञात होता है कि इस प्रकार के यौगिक संयोजकता के उन सब नियमों का उल्लंघन करते हैं जो धातु तथा अधातु के संयोग से बननेवाले यौगिकों द्वारा प्रतिपादित हुए हैं। उदाहरणार्थ, सोडियम, टिन और सीसा के साथ रासायनिक क्रिया कर निम्नलिखित यौगिक बनाता है :

NaSn6, NaSn4, NaSn3, NaSn2, (NaSn), (Na4 Sn2), (Na Pb5), (Na4 Pb9), (Na Pb), (Na2 Pb), तथा (Na4 Pb)। अनेक अंतराधातुक यौगिक बहुत स्थायी होते हैं और अपने गलनांक से अधिक ताप पर गरम करने से भी अपनी अवयव धातुओं में विघटित नहीं होते। ये यौगिक तरल अमोनिया में घुलते हैं और इस प्रकार से जो विलयन तैयार होता है, वह वैद्युत्‌ चालक होता है। जब इनका वैद्युत अपघटनDecomposition किया जाता है, तब एक अवयव धातु, जो दूसरी की अपेक्षा न्यून धनविद्युती (electropositive) होती है, धनाग्र पर जमती है और दूसरी ऋणाग्र पर। अंतराधातुक यौगिक क्यों बनाता है, इसकी अभी तक सैद्धांतिक व्याख्या नहीं हुई। केवल इतना ही प्रतिपादित हो पाया है कि वे धातुएँ, जिनके गुण एक से हैं, एक दूसरे के साथ संयोग नहीं करती हैं। चूँकि इस प्रकार की मिश्रधातुएँ कठोर, भंगुर, बहुत ही कम तन्यशील तथा लचीली होती हैं, अत: इनमें से केवल कुछ ही उपयोगी हैं।

प्रमुख मिश्रधातुएँ सब मिश्रधातुओं को साधारणतया लौह तथा अलौह मिश्रधातुओं में विभाजित किया गया है। जब मिश्रधातु में लोहा आधार धातुBase metal रहता है, तब वह लौह तथा जब आधार धातु कोई अन्य धातु होती है, तब वह अलौह मिश्रधातु कहलाती है।

अलौह मिश्रधातुएँ कुछ मुख्य अलौह मिश्रधातुएँ निम्नलिखित हैं:

(1) ऐल्युमिनियम-पीतल (Aluminimum-brass) - इसके संगठन में ताँबा, जस्ता और ऐल्युमिनियम हैं, जो क्रमश: 71-55, 26-42 तथा 1-6 प्रतिशत तक होते हैं। इसका उपयोग पानी के जहाजों तथा वायुयान के नोदकों (propeller) के निर्माण में होता है।

(2) ऐल्युमिनियम-कांसा - इसमें ताँबा 99-89 तथा ऐल्युमिनियम 1-11 प्रतिशत तक होता है। यह अति कठोर तथा संक्षारण अवरोधक होता है। इसके बरतन बनाए जाते हैं।

(3) बबिट (Babit) धातु - इसमें टिन, ऐंटीमनी तथा ताँबा की प्रतिशत मात्रा क्रमश: 89, 7.3 तथा 3.7 होती है। इसका मुख्य उपयोग बॉल बियरिंग बनाने में होता है।

(4) घंटा धातु (Bell metal) - इसमें ताँबा और टिन की प्रतिशत मात्रा क्रमश: 75-80 और 25-20 तक होती है। इससे घंटे आदि बनाए जाते हैं।

(5) पीतल - इसमें ताँबा 73-66 तथा जस्ता 27-34 प्रतिशत तक होता है। इसका उपयोग चादर, नली तथा बरतन बनाने में होता है।

(6) कार्बोलाय (Carboloy) - यह टंग्स्टन कार्बाइड तथा कोबल्ट की मिश्रधातु है। इससे रगड़ने और काटने वाले यंत्र बनाए जाते हैं।

(7) कॉन्स्टैंटेन (Constantan) - इसमें तांबा 60-45, निकल 40-55, मैगनीज 0-1.4, कार्बन 0.1 प्रतिशत तथा शेष लोहा होता है। इसका उपयोग वैद्युत-तापमापक यंत्रों तथा ताप वैद्युत-युग्म (thermocouple) बनाने में होता है, क्योंकि यह विद्युत्‌ का प्रबल प्रतिरोधक होता है।

(8) डेल्टा धातु (Delta metal) - इसमें ताँबा 56-54, जस्ता 40-44, लोहा 0.9-1.3, मैंगनीज 0.8-1.4 और सीसा 0.4-1.8 प्रतिशत तक होता है। यह मृदु इस्पात के समान मजबूत है, किंतु उसकी तरह सरलता से जंग खाकर नष्ट नहीं होती। इसका उपयोग पानी के जहाज बनाने में होता है।

(9) डो धातु (Dow metal) - इसमें मैग्नीशियम 90-96, ऐल्युमिनियम 10-4 प्रतिशत तक तथा कुछ अंशों में मैंगनीज़ होता है। इसका उपयोग मोटर तथा वायुयान के कुछ हिस्सों को बनाने में होता है।

(10) जर्मन सिलवर - इसमें ताँबा 55, जस्ता 25 और निकल 20 प्रतिशत होता है। कुछ वस्तुओं को बनाने में चाँदी के स्थान पर इसका उपयोग करते हैं, क्योंकि इससे बनी वस्तुएँ चाँदी के समान ही होती हैं।

(11) हरित स्वर्ण (Green gold) - इसमें सोना, चाँदी और कैडमियम, क्रमश: 75, 11-25 तथा 13-0 प्रतिशत तक, होते हैं। इसके आभूषण बनाए जाते हैं।

(12) गन मेटल (Gun metal) - इसमें ताँबा 95-71, टिन 0-11, सीसा 0.-13, जस्ता 0-5 तथा लोहा 0-1.4 प्रतिशत तक होता है। इससे बटन, बिल्ले, थालियाँ तथा दाँतीदार चक्र (gear) बनाए जाते हैं।

(13) मैग्नेलियम (Magnalium) - इसमें ऐल्युमिनियम 95-70 प्रतिशत तथा मैग्नीशियम 5-30 प्रतिशत तक होता है। यह मिश्रधातु हल्की होती है। इसका उपयोग विज्ञान संबंधBondी यंत्रों तथा तुलादंड बनाने में होता है।

(14) नाइक्रोम (Nichrome) - इसमें निकल 80-54, क्रोमियम 10-22, लोहा 4.8-27 प्रतिशत तक होते हैं। ऊँचे ताप पर इसका संक्षारण नहीं होता तथा इसका वैद्युत प्रतिरोध अधिक होता है। इसका उपयोग ऊष्मक (heater) बनाने में होता है।

(15) पालौ (Palau) - इसमें सोना 80 तथा पैलेडियम 20 प्रतिशत होते हैं। मूषा (crucibles) और थाली बनाने में प्लैटिनम के स्थान पर इसका उपयोग किया जाता है।

(16) पर्मलॉय (Permalloy) - इसमें निकल 78, लोहा 21, कोबल्ट 0.4 प्रतिशत तथा शेष मैगनीज, ताँबा, कार्बन, गंधकSulphur और सिलीकन होते हैं। इससे टेलीफोन के तार बनाए जाते हैं।

(17) सोल्डर (Solder) - इसमें सीसा 97 तथा टिन 33 प्रतिशत होते हैं। यह धातु दो धातुओं को आपस में जोड़ने के काम आती है।

(18) शॉट धातु (Shot metal) - इसमें सीसा 99 तथा आर्सेनिकArsenic 1 प्रतिशत होता है। इससे बंदूक की गीली तथा छरें बनाए जाते हैं।

(19) टिन की पन्नी (Tin foil) - इसमें टिन 88, सीसा 8, ताँबा 4 और ऐंटिमनी 0.5 प्रतिशत होते हैं। यह पन्नी सिगरेट और खाद्य वस्तुओं को सुरक्षित रखने के लिये उनके ऊपर लपेटी जाती है।

(20) उड की धातु (Wood metal) - यह मिश्रधातु सर्वप्रथम उड ने बनाई थी। इसमें बिस्मथ 50, सीसा 25, टिन 13 और कैडमियम 13 प्रतिशत होते हैं। इसका गलनांक बहुत कम होता है। आग को पानी छिड़क कर बुझानेवाले, स्वचालित यंत्रों में, जो प्लग (plug) लगा रहता है वह इस मिश्रधातु का बना होता है।

लोह मिश्रधातुएँ आधुनिक युग में लौहमिश्र धातुओं का अधिकतम महत्व है। इसके अंतर्गत इस्पात और ढलवाँ लोहाCast iron (cast iron) तथा पिटवाँ लोहा (wrought iron) लोहा आते हैं। जब शुद्ध गलित लोहे को ठंडा करते हैं, तब 1,535˚ सें0 पर तरल लोहे से क्रिस्टलीय रूप में इस प्रकार का लोहा निकलता है। इसको डेल्टा लोहा (δ-लोहा) कहते हैं। यह लोहा दूसरे प्रकार के क्रिस्टल में 1,404˚ सें पर परिवर्तित हो जाता है। इसको गामा लोहा (γ-लोहा) कहते हैं। यह 900˚सें0 के ऊपर स्थायी रहता है और इस ताप पर ऐल्फा लोहा में परिवर्तित हो जाता है, जो साधारण ताप पर स्थायी रहता है। लोहा और कार्बन का एक यौगिक बनता है, जिसमें कार्बन की प्रतिशत मात्रा 6.67 होती है। इस मिश्रधातु को सेमेंटाइट (Sementite) कहते हैं। यह मिश्रधातु गामा लोहा (y-लोहा) के साथ ठोस विलयन बनाती है, जिसको ऑस्टेनाइट (Austenite) कहते हैं। इस्पात में कार्बन की मात्रा 0.5 से लेकर 1.5 प्रतिशत तक रहती है। जब गलित इस्पात ठोस होता है, तब ऑस्टेनाइट के ठोस विलयन-क्रिस्टल प्राप्त होते हैं। ये क्रिस्टल मुलायम होते हैं और इनसे चद्दरे, छड़ तथा तार सरलता से बनाए जाते हैं।

मोटर गाड़ियों के विकास के साथ साथ वे तत्व, जिनको केवल रसायनज्ञ ही जानते थे, इस्पात के साथ मिश्रधातु बनाने के उपयोग में लाए गए। ये इस्पात मिश्रधातुएँ मोटर गाड़ियों के इंजिनों के हिस्से बनाने तथा ये हिस्से जिन यंत्रों से बनाए जाते हैं, उनको बनाने में काम आती हैं। उदाहरणार्थ, मैंगनीज से इस्पात की मजबूती बढ़ती है और यह ऑक्सीजन और गंधक को, जो इस्पात को दुर्बल तथा भंगुर बना देते हैं, इस्पात में से अलग कर देता है। निकल इस्पात की मजबूती को बिना उसकी भंगुरता बढ़ाए बढ़ा देता है। क्रोमियम की कम मात्रा इस्पात को कठोरता प्रदान करती है और इसकी अधिक मात्रा इस्पात को संक्षारण से बचाती है। स्टेनलेस स्टील में क्रोमियम होता है। वैनेडियम-इस्पात (vanadium-steel) आघातसह (shock proof) होता है और मोलिब्डेनम्‌-इस्पात (molybdenum-steel) अधिक कठोर तथा ऊष्मा अवरोधक होता है। इस्पात-मिश्रधातुएँ केवल कार्बन-इस्पात से अधिक महँगी पड़ती हैं।

मिश्रधातु संघटन उपयोग

पीतल Cu-70%, Zn-30% तार, मशीनों के पुर्जे, बर्तन के रूप में

कांसा Cu-88%, Sn-12% बर्तन, मूर्तियाँ बनाने में

कृत्रिम सोना Cu-90%, A1-10% आभूषण तथा मूर्तियाँ बनाने में

मुद्रा धातु Cu-95%, Sn−4%, P-1% मुद्राएँ बनाने में

गन मेटल Cu-88%, Sn-10%, Zn-2% बन्दूक तथा मशीनों के पुर्जे के रूप में

बेल मेटल Cu-80%, Sn-20% घंटा बनाने में

कान्सटैंटन Cu-60%, Ni-40% तार के रूप में

मोनल मेटल Cu-28%,Fe-2%,Ni-70% मूर्तियाँ बनाने में

जर्मन सिल्वर Cu-50-61.6%, Zn-19-17.2%, Ni–30–21.1% बर्तन, मूर्तियाँ बनाने में

डच मेटल Cu-80%, Zn-20% मशीनों के पुर्जे बनाने में

मैग्नेलियम Al-95%, Mg-5% वायुयान व जहाज बनाने में

ड्यूरेलुमिन Al-95%, Mg-1%, Cu-4% वायुयान, प्रेशर कुकर आदि बनाने में

एलुमिनियम ब्रांज Al-10%, Cu-90% बर्तन, मुद्रायें, आभूषण, पेन्ट आदि बनाने में

नाइक्रोम Ni–58–62%, Fe-22-25%, Cr-8–13%, C-0.2-1% Mn, Zn, SiO,-1-2% विद्युत् तापन अवयव बनाने में

सोल्डर Pb-68% Sn-3.2% वैद्युत् सम्बन्ध में

एल्निको Steel-50%, A1-20%, Ni–20%, Co-10% चुम्बकों के निर्माण में

मैंगनीज स्टील Mn-14%, Fe-80-85% तिजोरियों, रेल की पटरियों में लगे गर्डर, कूटने और पीसने की मशीनों में

क्रोमियम स्टील Cr-2-4%, C-1-5%, Fe-90-95% काटने वाले औजार, मशीन, गोलियां आदि बनाने में


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