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रसायन विज्ञान की दृष्टि से ब्रह्माण्ड में दो ही चीजें है- दव्य/पदार्थ विद्युतत-चुतंबकीय विकरण। 6वीं सदी (ई.पू.) मे भारतीय दाशरिनिक कणाद की अभिभधारणा ➢ दव्यों को छोटे कणों में विभािजत करने की एक सीमा होती है। ➢ उन्होंने दव्यों का गठन करने विाले अिविभाज्य कणों को 'परमाणुAtom' कहा। ➢ परमाणुत अविनाश होता है तथा इसका कोई स्वतंत्र अस्तत्वElementि नहीं होता है। विभन्न पदार्थों में के परमाणुत िभन्न-भन्न प्रकार के होते है। - महर्षिषर कणाद


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